काशी में 251 वर्षों से चने और गुड़ के भोग से प्रसन्न हैं मां जगदम्बा, नहीं हुई विसर्जित

नारस। धर्म की नगरी काशी में धर्म की कई कहानियां है। पुराणों में उल्लेखित कई कहानियों के अलावा यहाँ कई चमत्कार भी है। उन्ही में से एक है मदनपुरा स्थित पुरानी दुर्गा बाड़ी, जहां 251वर्ष पूर्व नवरात्र में बैठायी गयी मां दुर्गा आज भी वहां विराजमान हैं। उन्होंने इच्छा जताई की मुझे सिर्फ रोज़ चना और गुड़ का भोग लगना मै काशी में ही रहूंगी कहीं नहीं जाऊंगी और आज 251 वर्षों से मां दुर्गा अपने भक्तों की मनोकामना पूरी कर रही हैं।

251 वर्षों से नहीं हुई विसर्जित 
कहते हैं स्वप्न में देखि गयी चीज़ें बहुत काम सही होती हैं और अक्सर लोग इसे नहीं मानते हैं, लेकिन धर्म की नगरी काशी में बंगाली परिवार का स्वप्न आज लोगों की मनोकामना पूरी कर रहा है। इस बारे में बात करते हुए हेमंत कुमार मुखर्जी ने बताया कि 251 वर्ष पूर्व इस प्रतिमा को यहाँ स्थापित किया गया था। दशमी के दिन जब इसे विसर्जन के लिए उठाया जाने लगा तो मूर्ती नहीं उठी। आस पास के लोगों ने भी कोशिश की पर किसी भी तरह से मूर्ती यहां से हिली नहीं।

मै यही काशी में वास करूंगी
हेमंत कुमार मुखर्जी ने बताया कि हमारे पूर्वज ने कहा कि अब कल देखा जाएगा। रात में जब वो सोये तो रात में उनके स्वप्न में मां सक्षात प्रकट हुई और बोलीं की मै जहां हूँ मुझे वहीं रहने दो। मै अब काशी में वास करूंगी। इसपर हमारे पूर्वज ने उसने पूछा की मां आप की सेवा हम कैसे कर पाएंगे तो उन्होंने कहा कि न घबराओ हमें सिर्फ गुड़ और चने का भोग देना और तब से मां यहीं विराजमान हैं।

गुड़ और चने का भोग देना मुझे 
साल भर गुड़ और चने के भोग के साथ साथ नवरात्र में माता को फल और लायचीदाने का भी भोग चढ़ाया जाता है। हेमंत ने बताया कि चना और गुड़ मां ने इक्छा प्रकट की थी इसलिए सिर्फ वही उन्हें भोग में दिया जाता है या फल और इलायचीदाना, लेकिन चना और गुड़ रोज दिया जाता है।

मूर्ती है 251 साल पुरानी 
मां दुर्गा की बंगाली स्टाइल की मूर्ति मिट्टी, बांस, पुआल और सुतली से बनायी गयी है। जो 251 वर्षों से वैसे ही है। उसमे कोई भी खराबी नहीं आयी है। हेमंत ने बताया कि हर 6 साल बाद हम मूर्ती का रंग रोगन करते हैं और उसका गहना बदलते है और कपडे भी लेकिन मूर्ती आज तक वही है।

पूरी करती हैं मनोकामना 
हेमंत कुमार मुखर्जी ने बताया कि आज तक मूर्ती का पुआल, बांस और सुतली न अपनी जगह से हिलें है और ना ही खराब हुए है। वहीं हेमंत ने बताया कि संतान सुख के लिए यहां लोगों का साल भर तांता लगा रहता है और मां किसी को खाली हांथ नहीं जाने देती।